बिहार के लोक-नृत्य(Folk Dance Of Bihar)
बिहार के प्रमुख लोक-नृत्य निम्न हैं, जो आगामी BPSC परीक्षाओं के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण हैं :
झिझिया नृत्य (Folk Dance Of Bihar)
- झिझिया मिथिलांचल,बिहार का एक प्रमुख लोक नृत्य है।ग्रामीण मान्यतानुसार इस गीत में तंत्र मंत्र के बुरे प्रभाव से बचाने के लिए लड़कियाँ गीत गाकर अपने इष्ट देव ब्रह्म बाबा को आमंत्रित करती है कि वह आए और डायन जोगिन के बुरे प्रभाव से जनमानस को बचाएं।
- झिझिया नृत्य राजा चित्रसेन एवं उनकी रानी के प्रेम – प्रसंगों पर आधारित है।
- यह नृत्य सिर्फ महिलाओं के द्वारा किया जाता है।
- इस नृत्य में ग्रामीण महिलाएँ अपनी सखी-सहेलियों के साथ एक घेरा बना लेती है। घेरा के बीच में एक महिला जो मुख्य नर्तकी की भूमिका निभाती है सिर पर जलते दिए एवं छिद्र वाली घड़ा लेकर नृत्य करती है।

कजरी गीत (Folk Dance Of Bihar)
- कजरी वर्षा ऋतु का गीत है।
- कजरी गीतों की लोकप्रिय मधुर धुन शरीर में एक मधुर अनुभूति पैदा करती है और इसे श्रावण मास की शुरुआत से ही बारिश के तालबद्ध स्वर के साथ सुना जाता है।
कठघोरवा नृत्य (Folk Dance Of Bihar)
- इस नृत्य में लकड़ी तथा बाँस की खपच्चियों द्वारा निर्मित सुसज्जित घोड़े को नर्तक अपने कमर में बांध लेता है।
- नर्तक आकर्षक वेशभूषा बनाकर नृत्य करता है।
- आज प्रायः इस नृत्य का प्रचलन नहीं के बराबर है।
झरनी नृत्य (Folk Dance Of Bihar)
- झरनी नृत्य मुहर्रम के अवसर पर सिर्फ मुसलिम नर्तकों द्वारा किया जाता है।
- नर्तक एक छोर पर बंटी हुई बांस की छड़ियों का उपयोग करते हैं।
- वे एक गोलाकार रूप में खड़े होते हैं, और चारों ओर घूमते हैं, प्रत्येक नर्तक अपने साथी की छड़ी से टकराता है।
- उत्पादित ध्वनि नृत्य के लिए ताल प्रदान करती है।
- इस गीत में नर्तक शोक गीत भी गाते हैं और अपने अभिनय के द्वारा शोकाभिव्यक्ति भी करते हैं।
जाट-जटिन (Folk Dance Of Bihar)
- जाट-जटिन उत्तर बिहार का सबसे लोकप्रिय लोक नृत्य है, खासकर मिथिला और कोशी क्षेत्र में।
- यह पुरुष और महिला की एक जोड़ी द्वारा किया जाता है।
- जाट-जटिन अपने पति के साथ ही एक प्रवासी पति का लोक नृत्य है।
- गरीबी और दुख के अलावा, यह नृत्य मधुर और कोमल झगड़े के साथ-साथ पति-पत्नी के बीच कुछ शिकायतों को भी दर्शाता है।
- गीत की हेडलाइन है “टिकवा-जब-जब मौगैलियन रे जटवा – टिकवा कहे न लॉले रे …”
झुमरी (Folk Dance Of Bihar)
- झुमरी मिथिलांचल का लोक नृत्य है।
- अश्विन के महीने के बाद कार्तिक अपने साफ आसमान के साथ आता है। कार्तिक की पूर्णिमा की रात को गांव की युवतियां ऋतु की बारी का जश्न मनाने के लिए गाती और नृत्य करती हैं।
लौंडा नृत्य (Folk Dance Of Bihar)
- लौंडा नृत्य विवाह एवं अन्य मांगलिक अवसरों पर लड़के द्वारा लड़की का रूप बनाकर किया जाता है।
- यह नृत्य बिहार में मुख्य रूप से भोजपुरी क्षेत्र में प्रचलित है।
- इस नृत्य का सर्वाधिक प्रचलन बारात में है।
पमरिया लोक नृत्य (Folk Dance Of Bihar)
- यह नृत्य जन्म आदि के अवसर पर पुरषों द्वारा किया जाता है।
- इस नृत्य में पुरुष नर्तक घाघरा-चोली पहनकर ढोल-मजीरा बजाते हैं, लोक-गीत गाते हैं तथा नृत्य करते हैं।
सोहर खेलवाना (Folk Dance Of Bihar)
- सोहर खेलवाना एक बच्चे के जन्म का जश्न मनाने के लिए महिलाओं द्वारा किया जाने वाला नृत्य है।
- भारत में नवजात के आगमन को पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है।
- बच्चे को परिवार के सदस्यों, पड़ोसियों और शुभचिंतकों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
- सोहर गीतों के माध्यम से, महिलाएं नवजात की तुलना भगवान राम और भगवान कृष्ण से करती हैं, जो लोकप्रिय हिंदू देवता हैं जो पुण्य के अवतार हैं। किन्नर बच्चे के जन्म के उत्सव का एक अभिन्न अंग हैं और इस नृत्य में भाग लेते हैं।
होली नृत्य (जोगीड़ा नृत्य)(Folk Dance Of Bihar)
- जोगीड़ा नृत्य बिहार का प्रसिद्ध लोक नृत्य है। यह बिहार के सर्वाधिक लोकप्रिय नृत्यों में से एक है। जोगीड़ा नृत्य सम्पूर्ण बिहार में आयोजित किया जाता है। नृत्य का आयोजन भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक होली पर होता है।
- इसमें ग्रामीण युवक-युवतियां एक-दूसरे को रंग-अबीर लगाकर फाग गाते हुए नृत्य करते हैं ।
चैता (Folk Dance Of Bihar)
- चैत गीत, जैसा कि नाम से पता चलता है, चैत्र के महीने में गाए जाते हैं, जब सरसों के पौधों में फूल दिखाई देते हैं। पुरुष ये रोमांटिक गाने गाते हैं।
मगही झुमर नृत्य (Folk Dance Of Bihar)
- मगही झुमर नृत्य आमतौर पर युगल के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, जहां पुरुष और महिला नर्तक पति और पत्नी की भूमिका निभाते हैं।
- वे अपनी इच्छाओं और आकांक्षाओं को व्यक्त करते हुए एक स्वर में नृत्य करते हैं।
- पत्नी अपने पति से अच्छे कपड़े और सुंदर आभूषण मांगती है।
- पति उसे वह सब कुछ देने का वादा करता है जो वह चाहती है।
- यह जीवंत लोक नृत्य मधुर संगीत की संगत में किया जाता है।
करमा नृत्य (Folk Dance Of Bihar)
- पारंपरिक कर्म नृत्य का नाम कर्म वृक्ष से मिलता है जो भाग्य और सौभाग्य का प्रतीक है। नृत्य की शुरुआत पेड़ के रोपण के साथ होती है, इसके बाद इसके चारों ओर गोलाकार आकृतियाँ बनती हैं।
- इस समूह नृत्य में आमतौर पर उतने ही पुरुष होते हैं जितने महिला नर्तक।
- नर्तक ढोल की ताल और महिला लोक की ताली पर झूम उठते हैं।
- नर्तक अपने पड़ोसियों की कमर पर हाथ रखते हैं और अर्धवृत्ताकार पंक्तियाँ बनाते हैं।
- नर्तकियों की प्रत्येक पंक्ति मंडूर और टिमकी की संगत में बारी-बारी से गाती और नृत्य करती है।
- ढोल तेज और जोर से बजते हैं और नृत्य एक सुखद स्वर पर समाप्त होता है।
नटुआ (Folk Dance Of Bihar)
- नटुआ नृत्य की शुरुआत नटुआ कचल नामक एक वस्तु से होती है।
- इस युगल प्रदर्शन में, साथ में संगीत वाद्ययंत्रों में नागरा, ढोल और शेनाई शामिल हैं।
- नर्तकियों द्वारा पहने जाने वाले परिधान स्वदेशी और आकर्षक होते हैं।
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